लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।
मूल पाठ
भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।
स्रोत अभिलेख 6.46 · पुस्तक पृ. 816, 817
भावार्थ
मूल पाठ के बादपलभरमें अत्यन्त अन्धकार हो गया। खून, पत्थर और राखकी वर्षा होने लगी॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 817 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।
English explanation
In an instant, deep darkness fell, and blood, stones, and ash began to rain down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया | arose |
| निमिष | एक क्षण | an instant |
| महँ | में | in |
| अति | अत्यंत | very deep |
| अँधियारा | अँधेरा | darkness |
| बृष्टि | वर्षा | rain |
| होइ | होने लगी | began to fall |
| रुधिरोपल | रक्त और पत्थरों की | of blood and stones |
| छारा | राख की | of ash |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 817
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 816, 817
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