लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।
मूल पाठ
प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।
अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।
स्रोत अभिलेख 6.46 · पुस्तक पृ. 816, 817
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[राक्षस और वानर युद्ध करते हुए ऐसे जान पड़ते हैं] मानो क्रमश: वर्षा और शरद्-ऋतुके बहुत-से बादल पवनसे प्रेरित होकर लड़ रहे हों। अकंपन और अतिकाय इन सेनापतियोंने अपनी सेनाको विचलित होते देखकर माया की॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 817 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।
English explanation
They fought as though masses of rainy-season and autumn clouds, driven by the wind, were colliding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राबिट | वर्षा ऋतु के | of the rainy season |
| सरद | शरद ऋतु के | of autumn |
| पयोद | बादल | clouds |
| घनेरे | घने और बहुत से | dense and numerous |
| लरत | टकराते हों | were clashing |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मारुत | वायु | the wind |
| के | के द्वारा | by |
| प्रेरे | प्रेरित; धकेले हुए | driven |
2 अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।
English explanation
As the army faltered, the commanders Akampana and Atikaya worked their illusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनिप | सेनानायक | army commanders |
| अकंपन | राक्षस सेनानायक अकंपन | Akampana, a demon commander |
| अरु | और | and |
| अतिकाया | राक्षस योद्धा अतिकाय | Atikaya, a demon warrior |
| बिचलत | विचलित होती हुई | faltering |
| सेन | सेना | army |
| कीन्हि | रची | created |
| इन्ह | इन्होंने | these two |
| माया | मायावी दृश्य | a magical illusion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 817
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 816, 817
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।