लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।
मूल पाठ
बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।
सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।
स्रोत अभिलेख 6.26 · पुस्तक पृ. 797, 797
भावार्थ
मूल पाठ के बादगरुडज़ी क्या पक्षी हैं? शेषजी क्या सर्प हैं? अरे रावण! चिन्तामणि भी क्या पत्थर है? अरे ओ मूर्ख! सुन, वैकुण्ठ भी क्या लोक है? और श्रीरघुनाथजीकी अखण्ड भक्ति क्या [और लाभों- जैसा ही] लाभ है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 797 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।
English explanation
Ravana, is Garuda merely a bird, the thousand-headed Shesha merely a snake, or the wish-fulfilling jewel merely a stone?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैनतेय | विनता के पुत्र गरुड़ | Garuda, Vinata’s son |
| खग | पक्षी | bird |
| अहि | साँप | snake |
| सहसानन | हजार मुख वाले शेषनाग | Shesha, the thousand-headed serpent |
| चिंतामनि | मनोकामना पूरी करने वाला रत्न | the wish-fulfilling jewel |
| पुनि | और; फिर | and; further |
| उपल | पत्थर | stone |
| दसानन | हे दस मुख वाले रावण | O ten-headed Ravana |
2 सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।
English explanation
Listen, dull-witted one: is Vaikuntha merely a realm, and unwavering devotion to Rama merely an ordinary gain?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| मतिमंद | हे मंदबुद्धि | you dull-witted one |
| लोक | लोक; संसार-क्षेत्र | world; realm |
| बैकुंठा | विष्णु का धाम बैकुंठ | Vaikuntha, Vishnu’s abode |
| लाभ | लाभ; प्राप्ति | gain; attainment |
| कि | क्या | is it; whether |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| भगति | भक्ति | devotion |
| अकुंठा | अखंड; अविचल | unhindered; unwavering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 797
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 797, 797
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।