लङ्काकाण्ड · दोहा 26 · दोहा/सोरठा
सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।
सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।
कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.26 · पुस्तक पृ. 797, 797
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।
सेना सहित तुम्हारा अभिमान चूर करके, वन उजाड़कर और नगर जलाकर—
English explanation
Having crushed your pride along with your army, ravaged the grove, and burned the city—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेन | सेना | army |
| सहित | सहित; समेत | along with |
| तब | संभवतः तुम्हारा | probably your |
| मान | अभिमान | pride |
| मथि | चूर करके | having crushed |
| बन | वन; अशोक-वाटिका | grove; the Ashoka garden |
| उजारि | उजाड़कर | having ravaged |
| पुर | नगर; लंका | city; Lanka |
| जारि | जलाकर | having burned |
2 कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।
हे मूर्ख, तुम्हारे पुत्र को मारकर चले गए हनुमान केवल साधारण वानर कैसे हैं?
English explanation
You fool, how is Hanuman, who killed your son and departed, merely an ordinary monkey?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कस | कैसे | how |
| रे | अरे | you; O |
| सठ | मूर्ख | fool |
| हनुमान | रामदूत हनुमान | Hanuman, Rama’s messenger |
| कपि | साधारण वानर | an ordinary monkey |
| गयउ | चले गए | departed |
| जो | जो | who |
| तव | तुम्हारे | your |
| सुत | पुत्र | son |
| मारि | मारकर | having killed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 26
- स्रोत अभिलेख
- 6.26
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 797, 797
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