लङ्काकाण्ड · दोहा 25 · दोहा/सोरठा
तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।
तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।
रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.25 · पुस्तक पृ. 796, 796
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।
तू उस रावण को तुच्छ कहता है और एक मनुष्य की प्रशंसा करता है!
English explanation
You call that Ravana insignificant and praise a mere man!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| रावन | रावण | Ravana, king of Lanka |
| कहँ | को | as the object of ‘call’ |
| लघु | तुच्छ | insignificant |
| कहसि | तू कहता है | you call |
| नर | मनुष्य, यहाँ राम | a man, here Rama |
| कर | का | of |
| करसि | तू करता है | you make |
| बखान | प्रशंसा | praise |
2 रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।
अरे वानर, असभ्य, क्षुद्र और दुष्ट! अब मैं तेरे ज्ञान को समझ गया।
English explanation
You monkey—uncouth, petty, and wicked! Now I understand the extent of your wisdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रे | अरे | you! |
| कपि | वानर, यहाँ अंगद | monkey, here Angada |
| बर्बर | असभ्य | uncouth |
| खर्ब | क्षुद्र या छोटा | petty or small |
| खल | दुष्ट | wicked |
| अब | अब | now |
| जाना | मैंने जान लिया | I have understood |
| तव | तेरा | your |
| ग्यान | ज्ञान या समझ | knowledge or understanding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 25
- स्रोत अभिलेख
- 6.25
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 796, 796
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