लङ्काकाण्ड · दोहा 24 · दोहा/सोरठा
एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।
एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।
इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.24 · पुस्तक पृ. 794, 796
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।
एक का वर्णन करते मुझे बहुत संकोच होता है: वह बालि की काँख में रहा था।
English explanation
I feel great embarrassment recounting another: he was held under Bali's arm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक रावण का | of one Ravana |
| कहत | कहते हुए | while recounting |
| मोहि | मुझे | to me |
| सकुच | संकोच होता है | embarrassment arises |
| अति | बहुत | great |
| रहा | रहा था | remained |
| बालि | बालि; अंगद के पिता | Bali, Angada's father |
| की | की | of |
| काँख | काँख में | under the arm; in the armpit |
2 इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।
हे रावण, इनमें तुम कौन हो? क्रोध छोड़कर सच बताओ।
English explanation
Ravana, which of these are you? Set aside your anger and tell the truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इन्ह | इनके | these |
| महुँ | बीच; में | among |
| रावन | हे रावण | O Ravana |
| तैं | तुम | you |
| कवन | कौन | which one |
| सत्य | सच | the truth |
| बदहि | कहो | say; tell |
| तजि | छोड़कर | setting aside |
| माख | क्रोध; खीझ | anger; resentment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 24
- स्रोत अभिलेख
- 6.24
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 794, 796
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