लङ्काकाण्ड · दोहा 23 (छ) · दोहा/सोरठा
हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।
हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।
जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.23 · पुस्तक पृ. 793, 794
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।
तब दस सिरों वाला रावण हँसकर बोला—वानर का एक बड़ा गुण है:
English explanation
Then ten-headed Ravana laughed and said, “A monkey has one great virtue:
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हँसि | हँसकर | laughing |
| बोलेउ | बोला | said |
| दसमौलि | दस सिरों वाला रावण | ten-headed Ravana |
| तब | तब | then |
| कपि | वानर | a monkey |
| कर | का | of |
| बड़ | बड़ा | great |
| गुन | गुण | virtue |
| एक | एक | one |
2 जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।
जो उसका पालन करता है, उसके हित के लिए वह अनेक उपाय करता है।
English explanation
For whoever sustains him, he makes many efforts to further that person’s interests.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| प्रतिपालइ | पालन करता है | sustains him |
| तासु | उसके | that person’s |
| हित | हित के लिए | for the benefit |
| करइ | करता है | makes |
| उपाय | उपाय | efforts |
| अनेक | अनेक | many |
| छ | पद-संदर्भ चिह्न (छ) | verse reference marker (छ) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 23 (छ)
- स्रोत अभिलेख
- 6.23
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 793, 794
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