लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।
मूल पाठ
बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।
मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।
स्रोत अभिलेख 6.59 · पुस्तक पृ. 828, 828
भावार्थ
मूल पाठ के बादहनुमान्जीको व्याकुल देखकर उन्होंने हृदयसे लगा लिया। बहुत तरहसे जगाया, पर वे जागते न थे! तब भरतजीका मुख उदास हो गया। वे मनमें बड़े दुखी हुए और नेत्रोंमें [विषादके आँसुओंका] जल भरकर ये वचन बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 828 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।
English explanation
Seeing Hanuman helpless and unconscious, Bharata clasped him to his chest. Hanuman did not awaken, though Bharata tried many ways to rouse him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकल | व्यथित और अचेत | distressed and unconscious |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| कीस | वानर हनुमान को | Hanuman, the monkey warrior |
| उर | छाती से | to his chest |
| लावा | लगा लिया | clasped |
| जागत | जाग रहे थे | was awakening |
| नहिं | नहीं | not |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| जगावा | जगाने का प्रयत्न किया | tried to awaken him |
2 मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।
English explanation
Bharata’s face grew downcast, and he became sorrowful at heart. With tears filling his eyes, he spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | चेहरा | face |
| मलीन | उदास, उतरा हुआ | downcast |
| मन | मन में | at heart |
| भए | हो गए | became |
| दुखारी | दुःखी | sorrowful |
| कहत | कहने लगे | began saying |
| बचन | वचन | words |
| भरि | भरकर | filling |
| लोचन | आँखों में | in his eyes |
| बारी | जल, आँसू | water; tears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 828
- सहायक विषय
- भरतजीके बाणसे हनुमान्का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 828, 828
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।