लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।
मूल पाठ
जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।
जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।
स्रोत अभिलेख 6.59 · पुस्तक पृ. 828, 828
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस विधाताने मुझे श्रीरामसे विमुख किया, उसीने फिर यह भयानक दु:ख भी दिया। यदि मन, वचन और शरीरसे श्रीरामजीके चरणकमलोंमें मेरा निष्कपट प्रेम हो,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 828 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।
English explanation
Bharata said, “The same fate that separated me from Rama has now given me this terrible sorrow.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिसने | which |
| बिधि | विधाता, भाग्य | fate; the disposer of destiny |
| राम | राम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख, अलग | turned away; separated |
| मोहि | मुझे | me |
| कीन्हा | कर दिया | made |
| तेहिं | उसी ने | that same fate |
| पुनि | फिर | again; now in turn |
| यह | यह | this |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दुख | दुःख | sorrow |
| दीन्हा | दिया | gave |
2 जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।
English explanation
If in my mind, speech, and body there is sincere love for Rama’s lotus feet—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| मोरें | मेरे | my |
| मन | मन में | in mind |
| बच | वचन में | in speech |
| अरु | और | and |
| काया | शरीर में | in body |
| प्रीति | प्रेम | love |
| राम | राम के | Rama’s |
| पद | चरणों के प्रति | toward the feet |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| अमाया | निष्कपट, छलरहित | sincere; free of deceit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 828
- सहायक विषय
- भरतजीके बाणसे हनुमान्का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 828, 828
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