लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।
मूल पाठ
तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।
सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।
स्रोत अभिलेख 6.59 · पुस्तक पृ. 828, 828
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर यदि श्रीरघुनाथजी मुझपर प्रसन्न हों तो यह वानर थकावट और पीड़ासे रहित हो जाय! यह वचन सुनते ही कपिराज हनुमान्जी 'कोसलपति श्रीरामचन्द्रजीकी जय हो, जय हो कहते हुए उठ बैठे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 828 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।
English explanation
Then may Hanuman be freed from exhaustion and pain, if Rama, lord of Raghu’s line, is gracious toward me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey warrior |
| होउ | हो जाएँ | may he become |
| बिगत | रहित, दूर हुए | gone; free of |
| श्रम | थकान | exhaustion |
| सूला | पीड़ा | pain |
| जौं | यदि | if |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | toward |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| अनुकूला | अनुकूल, कृपालु हैं | is favorable; gracious |
2 सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।
English explanation
Hearing these words, Hanuman sat up, saying, “Victory! All glory to the lord of Kosala!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| बचन | वचन | the words |
| उठि | उठकर | rising |
| बैठ | बैठ गए | sat up |
| कपीसा | श्रेष्ठ वानर हनुमान | Hanuman, chief among monkeys |
| कहि | कहकर | saying |
| जय | जय हो | victory; glory |
| जयति | जय हो, विजय हो | all glory; may he triumph |
| कोसलाधीसा | कोसल के अधीश्वर राम की | to Rama, sovereign of Kosala |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 828
- सहायक विषय
- भरतजीके बाणसे हनुमान्का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 828, 828
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।