लङ्काकाण्ड · दोहा 59 · दोहा/सोरठा
लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।
लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।
प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.59 · पुस्तक पृ. 828, 828
भावार्थ और शब्दार्थ
1लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।
भरत ने हनुमान को छाती से लगा लिया; उनका शरीर रोमांचित था और आँखें आँसुओं से भरी थीं।
English explanation
Bharata clasped Hanuman to his chest; his body thrilled with emotion and his eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लीन्ह | ले लिया | took; clasped |
| कपिहि | वानर हनुमान को | Hanuman, the monkey warrior |
| उर | छाती से | to his chest |
| लाइ | लगाकर | drawing close |
| पुलकित | रोमांचित | thrilled, with hair standing on end |
| तनु | शरीर | body |
| लोचन | आँखें | eyes |
| सजल | आँसुओं से भरी | filled with tears |
2 प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।
रघुकुल के तिलक राम को स्मरण करके भरत का प्रेम हृदय में समाता न था।
English explanation
Remembering Rama, the crowning glory of Raghu’s lineage, Bharata’s love overflowed his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | within the heart |
| समाइ | समाता था | could be contained |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| राम | श्रीराम को | Rama |
| रघुकुल | रघु के वंश के | of Raghu’s lineage |
| तिलक | गौरव, शोभा | crowning glory; ornament |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 59
- स्रोत अभिलेख
- 6.59
- सहायक विषय
- भरतजीके बाणसे हनुमान्का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 828, 828
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।