लङ्काकाण्ड · दोहा 58 · दोहा/सोरठा
देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।
देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।
बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.58 · पुस्तक पृ. 827, 828
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।
भरत ने अत्यंत विशाल आकृति देखी और मन में उसे राक्षस समझा।
English explanation
Bharata saw the immense figure and judged it in his mind to be a demon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखा | देखा | saw |
| भरत | भरत ने, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| बिसाल | विशाल | huge |
| अति | अत्यंत | extremely |
| निसिचर | राक्षस | a demon |
| मन | मन में | in his mind |
| अनुमानि | अनुमान करके | judging it to be |
2 बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।
भरत ने धनुष को कान तक खींचकर बिना फलक वाला बाण चलाया।
English explanation
Bharata drew the bow back to his ear and shot an arrow without a metal head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| फर | बाण का लोहे का फलक | a metal arrowhead |
| सायक | बाण | an arrow |
| मारेउ | चलाया | shot |
| चाप | धनुष | the bow |
| श्रवन | कान | his ear |
| लगि | तक | up to |
| तानि | खींचकर | having drawn back |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 58
- स्रोत अभिलेख
- 6.58
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 827, 828
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