लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबाण लगते ही हनुमान्जी 'राम, राम, रघुपति का उच्चारण करते हुए मूॢच्छत होकर पृथ्वीपर गिर पड़े। प्रिय वचन (रामनाम) सुनकर भरतजी उठकर दौड़े और बड़ी उतावलीसे हनुमान्जीके पास आये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 828 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।
सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।
स्रोत अभिलेख 6.59 · पुस्तक पृ. 828, 828
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।
English explanation
Struck by the arrow, Hanuman fell unconscious to the ground, remembering Rama, lord of Raghu’s line, with the words “Rama, Rama.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परेउ | गिर पड़े | fell |
| मुरुछि | मूर्छित होकर | having fainted |
| महि | धरती पर | on the ground |
| लागत | लगते ही | upon being struck by |
| सायक | बाण | the arrow |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | remembering; invoking |
| राम | श्रीराम का नाम | the name of Rama |
| राम | फिर राम का नाम | Rama’s name repeated |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक राम | Rama, lord of Raghu’s line |
2 सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।
English explanation
Hearing those dear words, Bharata rushed over and came to Hanuman in great distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रिय | प्रिय लगने वाले | dear; beloved |
| बचन | शब्द | words |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| तब | तब | then |
| धाए | दौड़े | rushed |
| कपि | वानर हनुमान के | of Hanuman, the monkey warrior |
| समीप | पास | near; beside |
| अति | अत्यंत | extremely |
| आतुर | व्याकुल | anxious; distressed |
| आए | आ पहुँचे | arrived |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 828
- सहायक विषय
- भरतजीके बाणसे हनुमान्का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 828, 828
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।