लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके बाणका प्रताप तो नीच मारीच भी जानता था। परन्तु आपने उसका कहना भी नहीं माना। जनककी सभामें अगणित राजागण थे। वहाँ विशाल और अतुलनीय बलवाले आप भी थे॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 807 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।
जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।
स्रोत अभिलेख 6.36 · पुस्तक पृ. 807, 808
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।
English explanation
Maricha knew the might of Rama’s arrow. Wretch, you did not heed his words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बान | बाण का | of the arrow |
| प्रताप | प्रताप, प्रभावशाली शक्ति | might |
| जान | जानता है | knows |
| मारीचा | राक्षस मारीच | Maricha, the demon |
| तासु | उसका | his |
| कहा | कहा हुआ, सलाह | words, counsel |
| नहिं | नहीं | not |
| मानेहि | तुमने माना | you heeded |
| नीचा | हे नीच | you wretch |
2 जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।
English explanation
Countless kings were in Janaka’s assembly; you too were present with your immense, supposedly incomparable strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक की | of King Janaka |
| सभाँ | सभा में | in the assembly |
| अगनित | अनगिनत | countless |
| भूपाला | राजा | kings |
| रहे | उपस्थित थे | were present |
| तुम्हउ | तुम भी | you too |
| बल | शक्ति | strength |
| अतुल | अतुलनीय | incomparable |
| बिसाला | विशाल | immense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 807
- सहायक विषय
- रावणको पुन: मन्दोदरीका समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 807, 808
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।