लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवहाँ शिवजीका धनुष तोड़कर श्रीरामजीने जानकीको ब्याहा, तब आपने उनको संग्राममें क्यों नहीं जीता? इन्द्रपुत्र जयन्त उनके बलको कुछ-कुछ जानता है। श्रीरामजीने पकड़कर, केवल उसकी एक आँख ही फोड़ दी और उसे जीवित ही छोड़ दिया॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 808 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।
सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।
स्रोत अभिलेख 6.36 · पुस्तक पृ. 807, 808
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।
English explanation
Rama broke the bow and married Janaki. Why did you not defeat him in battle then?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भंजि | तोड़कर | having broken |
| धनुष | धनुष | the bow |
| जानकी | सीता, जनक की पुत्री | Sita, Janaka’s daughter |
| बिआही | से विवाह किया | married |
| तब | तब | then |
| संग्राम | युद्ध में | in battle |
| जितेहु | तुमने जीता | you defeated |
| किन | क्यों नहीं | why not |
| ताही | उन्हें, राम को | him, Rama |
2 सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।
English explanation
Indra’s son knows something of Rama’s strength: Rama struck out his eye but spared his life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरपति | देवराज इंद्र का | of Indra, king of the gods |
| सुत | पुत्र जयंत | son Jayanta |
| जानइ | जानता है | knows |
| बल | राम की शक्ति | Rama’s strength |
| थोरा | थोड़ी-सी | a little |
| राखा | छोड़ दिया, बनाए रखा | spared, kept |
| जिअत | जीवित | alive |
| आँखि | आँख | eye |
| गहि | पकड़कर, प्रहार करके | seizing, striking |
| फोरा | फोड़ दी | put out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 808
- सहायक विषय
- रावणको पुन: मन्दोदरीका समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 807, 808
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।