लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।
मूल पाठ
बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।
पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।
स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 900, 901
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरामजीने जानकीजीको कलियुगके पापोंका हरण करनेवाली सुहावनी यमुनाजीके दर्शन कराये। फिर पवित्र गङ्गाजीके दर्शन किये। श्रीरामजीने कहा—हे सीते! इन्हें प्रणाम करो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 901 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।
English explanation
Then Rama showed Sita the lovely Yamuna, which removes the impurity of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | then |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| जानकिहि | जानकी अर्थात सीता को | to Janaki, Sita |
| देखाई | दिखाई | showed |
| जमुना | यमुना नदी | the Yamuna River |
| कलि | कलियुग का | of the age of Kali |
| मल | पापरूपी मल | sinful impurity |
| हरनि | हरने वाली | removing |
| सुहाई | सुंदर, सुहावनी | lovely, delightful |
2 पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।
English explanation
Then the holy Ganga came into view. Rama said, ‘Sita, bow in reverence.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| देखी | देखी; दृष्टि में आई | was seen |
| सुरसरी | गंगा, देवताओं की नदी | Ganga, the river of the gods |
| पुनीता | पवित्र | holy |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| कहा | कहा | said |
| प्रनाम | नमस्कार | reverent salutation |
| करु | करो | perform |
| सीता | हे सीता | O Sita |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 901
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 900, 901
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