लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।
मूल पाठ
सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।
तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।
स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 900, 901
भावार्थ
मूल पाठ के बादसम्पूर्ण ऋषियोंसे आशीर्वाद पाकर जगदीश्वर श्रीरामजी चित्रकूट आये। वहाँ मुनियोंको सन्तुष्ट किया। [फिर] विमान वहाँसे आगे तेजीके साथ चला॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 900 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।
English explanation
Having received blessings from all the sages, Rama, Lord of the world, came to Chitrakuta.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| रिषिन्ह | ऋषियों | sages |
| सन | से | from |
| पाइ | पाकर | having received |
| असीसा | आशीर्वाद | blessings |
| चित्रकूट | चित्रकूट नामक स्थान पर | to Chitrakuta |
| आए | आए | came |
| जगदीसा | जगत के स्वामी राम | Rama, Lord of the world |
2 तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।
English explanation
After the sages there had been pleased, the splendid aerial chariot departed from that place.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| करि | करके | having brought about |
| मुनिन्ह | मुनियों | the sages |
| केर | का | of |
| संतोषा | संतोष; प्रसन्नता | satisfaction, contentment |
| चला | चल पड़ा | departed |
| बिमानु | विमान | aerial chariot |
| तहाँ | वहाँ | there |
| ते | से | from |
| चोखा | सुंदर, उज्ज्वल | splendid, bright |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 900
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 900, 901
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।