लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।
मूल पाठ
तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।
देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।
पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।
स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 900, 901
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर तीर्थराज प्रयागको देखो, जिसके दर्शनसे ही करोड़ों जन्मोंके पाप भाग जाते हैं। फिर परम पवित्र त्रिवेणीजीके दर्शन करो, जो शोकोंको हरनेवाली और श्रीहरिके परम धाम [पहुँचने] के लिये सीढ़ीके समान है। फिर अत्यन्त पवित्र अयोध्यापुरीके दर्शन करो, जो तीनों प्रकारके तापों और भव (आवागमनरूपी) रोगका नाश करनेवाली है॥ ४-५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 901 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।
English explanation
Next behold Prayaga, lord of pilgrimage places; at its sight, the sins of millions of lifetimes flee.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तीरथपति | तीर्थों के स्वामी | lord of pilgrimage places |
| पुनि | फिर | next |
| देखु | देखो | behold |
| प्रयागा | प्रयाग तीर्थ को | Prayaga, the pilgrimage place |
| निरखत | देखते ही | upon beholding |
| जन्म | जन्मों के | of lifetimes |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions |
| अघ | पाप | sins |
| भागा | भाग जाते हैं; दूर हो जाते हैं | flee, disappear |
2 देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।
English explanation
Then behold the supremely purifying Triveni, which removes sorrow and is a stairway to Hari’s abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखु | देखो | behold |
| परम | अत्यंत | supremely |
| पावनि | पवित्र करने वाली | purifying |
| पुनि | फिर | then |
| बेनी | त्रिवेणी, प्रयाग का नदी-संगम | Triveni, the river confluence at Prayaga |
| हरनि | हरने वाली | removing |
| सोक | शोक | sorrow |
| हरि | भगवान हरि के | of Hari, the Lord |
| लोक | लोक तक | to the abode |
| निसेनी | सीढ़ी | stairway |
3 पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।
English explanation
Then behold the most holy city of Ayodhya, which removes the three kinds of affliction and the disease of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| देखु | देखो | behold |
| अवधपुरी | अयोध्या नगरी को | the city of Ayodhya |
| अति | अत्यंत | most |
| पावनि | पवित्र; पवित्र करने वाली | holy, purifying |
| त्रिबिध | तीन प्रकार के | threefold |
| ताप | दुःख, संताप | afflictions |
| भव | संसार; जन्म-मरण का चक्र | worldly existence, the cycle of birth and death |
| रोग | रोग | disease |
| नसावनि | नष्ट करने वाली | dispelling, destroying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 901
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 900, 901
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।