लङ्काकाण्ड · दोहा 120 (क) · दोहा
सीता सहित अवध कहुँ कीन्ह कृपाल प्रनाम।
सीता सहित अवध कहुँ कीन्ह कृपाल प्रनाम।
सजल नयन तन पुलकित पुनि पुनि हरषित राम॥ १२० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.12 · पुस्तक पृ. 900, 901
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सीता सहित अवध कहुँ कीन्ह कृपाल प्रनाम।
AI-प्रारूप: कृपालु राम ने सीता सहित अयोध्या को प्रणाम किया।
English explanation
AI draft: Compassionate Rama, together with Sita, bowed in reverence to Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| सहित | के साथ | together with |
| अवध | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| कहुँ | को | to |
| कीन्ह | किया | performed |
| कृपाल | कृपालु राम ने | compassionate Rama |
| प्रनाम | प्रणाम; आदरपूर्वक नमन | a reverential bow |
2सजल नयन तन पुलकित पुनि पुनि हरषित राम॥ १२० (क)॥
AI-प्रारूप: राम के नेत्र आँसुओं से भरे थे, शरीर रोमांचित था और वे बार-बार हर्षित हो रहे थे।
English explanation
AI draft: Rama’s eyes were filled with tears, his body thrilled with goosebumps, and he rejoiced again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| तन | शरीर | body |
| पुलकित | रोमांचित; रोम खड़े हुए | thrilled, with goosebumps |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| हरषित | आनंदित | joyful |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 120 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.12
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 900, 901
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।