लङ्काकाण्ड · दोहा 119 (ख) · दोहा/सोरठा
जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।
जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।
सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.119 · पुस्तक पृ. 899, 900
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।
वन में जहाँ-जहाँ कृपा-सागर राम ने निवास और विश्राम किया था—
English explanation
Wherever Rama, the ocean of compassion, had stayed and rested in the forest—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| कृपासिंधु | कृपा-सागर राम | Rama, ocean of compassion |
| बन | वन में | in the forest |
| कीन्ह | किया | made |
| बास | निवास | a stay |
| बिश्राम | विश्राम | rest |
2 सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।
वे सभी स्थान राम ने जानकी को दिखाए और सबके नाम बताए।
English explanation
Rama showed all those places to Janaki and told her each one’s name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी स्थान | all those places |
| देखाए | दिखाए | showed |
| जानकिहि | जानकी अर्थात सीता को | to Janaki, Sita |
| कहे | बताए | told |
| सबन्हि | सभी स्थानों | all the places |
| के | के | of |
| नाम | नाम | names |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse-reference marker (kha) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 119 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.119
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 899, 900
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