लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।
मूल पाठ
प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।
लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।
स्रोत अभिलेख 6.109 · पुस्तक पृ. 887, 887
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके वचनोंको सिर चढ़ाकर मन, वचन और कर्मसे पवित्र श्रीसीताजी बोलीं—हे लक्ष्मण! तुम मेरे धर्मके नेगी (धर्माचरणमें सहायक) बनो और तुरंत आग तैयार करो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 887 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।
English explanation
AI draft: Reverently accepting Lord Rama’s words, Sita, pure in thought, deed, and speech, spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| के | के | of |
| बचन | वचन | words |
| सीस | सिर पर | upon her head |
| धरि | रखकर; आदर से स्वीकार करके | placing; reverently accepting |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| बोली | बोलीं | spoke |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| पुनीता | पवित्र | pure |
2 लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।
English explanation
Lakshmana, be the executor of this duty of righteousness; kindle a fire quickly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | हे लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | O Lakshmana, Rama’s younger brother |
| होहु | बनो | become |
| धरम | धर्म | righteous duty |
| के | के | of |
| नेगी | कार्य का निर्वाह करने वाले | executor of the duty |
| पावक | अग्नि | fire |
| प्रगट | प्रकट; प्रज्वलित | manifest; alight |
| करहु | करो | make |
| तुम्ह | तुम | you |
| बेगी | शीघ्र | quickly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 887
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 887, 887
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।