लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।
मूल पाठ
नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।
सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।
स्रोत अभिलेख 6.66 · पुस्तक पृ. 835, 836
भावार्थ
मूल पाठ के बादनाक-कान काटे गये, ऐसा मनमें जानकर बड़ी ग्लानि हुई; और वह क्रोध करके लौटा। एक तो वह स्वभाव (आकृति)-से ही भयंकर था और फिर बिना नाक-कानका होनेसे और भी भयानक हो गया। उसे देखते ही वानरोंकी सेनामें भय उत्पन्न हो गया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 836 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।
English explanation
Realizing that his nose and ears had been cut off, Kumbhakarna turned back in anger, distressed at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाक | नाक | nose |
| कान | कान | ears |
| काटे | कटे हुए | cut off |
| जियँ | मन में | in his heart |
| जानी | जानकर | realizing |
| फिरा | लौटा; पलटा | turned back |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| करि | करके | with; giving way to |
| भइ | हुई | arose |
| मन | मन में | in his mind |
| ग्लानी | क्षोभ; खिन्नता | distress; vexation |
2 सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।
English explanation
Already fearsome by nature, he was now without ears and nose; seeing him, the monkey army became terrified.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभाव से ही | by nature |
| भीम | भयंकर | fearsome |
| पुनि | फिर; और अब | moreover; now |
| बिनु | बिना | without |
| श्रुति | कान | ears |
| नासा | नाक | nose |
| देखत | देखने पर | upon seeing |
| कपि | वानरों की | of monkeys |
| दल | सेना में | in the army |
| उपजी | उत्पन्न हुआ | arose |
| त्रासा | भय | fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 836
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 835, 836
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।