लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।
मूल पाठ
गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।
पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।
स्रोत अभिलेख 6.66 · पुस्तक पृ. 835, 836
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसने सुग्रीवका पैर पकड़कर उनको पृथ्वीपर पछाड़ दिया। फिर सुग्रीवने बड़ी फुर्तीसे उठकर उसको मारा। और तब बलवान् सुग्रीव प्रभुके पास आये और बोले—कृपानिधान प्रभुकी जय हो, जय हो, जय हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 835 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।
English explanation
Kumbhakarna seized Sugriva’s feet and dashed him to the ground. Sugriva sprang up with great agility and struck him again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहेउ | पकड़ लिए | seized |
| चरन | पैर | feet |
| गहि | पकड़कर | having grasped |
| भूमि | धरती पर | onto the ground |
| पछारा | पटक दिया | dashed down |
| अति | बहुत | great |
| लाघवँ | फुर्ती से | with agility |
| उठि | उठकर | rising |
| पुनि | फिर | again |
| तेहि | उसे, कुम्भकर्ण को | him, Kumbhakarna |
| मारा | मारा; प्रहार किया | struck |
2 पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।
English explanation
Then mighty Sugriva came to the Lord, saying, ‘Victory, victory, victory to you, O treasury of compassion!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| आयसु | फिर आया या लौट आया—संभवतः ‘आयउ’। | Came or returned—probably intended as ‘आयउ’. |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पहिं | के पास | to; near |
| बलवाना | बलवान सुग्रीव | mighty Sugriva |
| जयति | जय हो | victory to you |
| जयति | जय हो | victory to you |
| जय | जय हो | victory to you |
| कृपानिधाना | हे कृपा के भंडार | O treasury of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 835
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 835, 836
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।