लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।
मूल पाठ
सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।
काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।
स्रोत अभिलेख 6.66 · पुस्तक पृ. 835, 836
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुग्रीवकी भी मूच्र्छा दूर हुई, तब वे [मुर्दे-से होकर] खिसक गये (काँखसे नीचे गिर पड़े)। कुम्भकर्णने उनको मृतक जाना। उन्होंने कुम्भकर्णके नाक-कान दाँतोंसे काट लिये और फिर गरजकर आकाशकी ओर चले, तब कुम्भकर्णने जाना॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 835 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।
English explanation
Sugriva’s swoon also passed. He slipped from Kumbhakarna’s hold, since Kumbhakarna believed him dead.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुग्रीवहु | सुग्रीव की भी | Sugriva too |
| कै | की | possessive: his |
| मुरुछा | मूर्छा | unconsciousness |
| बीती | समाप्त हुई | ended |
| निबुक | पकड़ से निकलकर | slipping free |
| गयउ | गए | went; got away |
| तेहि | उसे, कुम्भकर्ण को | to him, Kumbhakarna |
| मृतक | मरा हुआ | dead |
| प्रतीती | विश्वास; समझ | belief; impression |
2 काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।
English explanation
Sugriva bit off Kumbhakarna’s nose and ears and, roaring, moved into the sky; Kumbhakarna became aware of it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटेसि | उन्होंने काट दिए | he cut off |
| दसन | दाँतों से | with his teeth |
| नासिका | नाक | nose |
| काना | कान | ears |
| गरजि | गरजकर | roaring |
| अकास | आकाश में | into the sky |
| चलउ | चले | moved away |
| तेहिं | उसने, कुम्भकर्ण ने | he, Kumbhakarna |
| जाना | जान लिया | realized |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 835
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 835, 836
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।