लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।
मूल पाठ
जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।
मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।
स्रोत अभिलेख 6.66 · पुस्तक पृ. 835, 836
भावार्थ
मूल पाठ के बादभगवान् [इसके द्वारा] जगत्को पवित्र करनेवाली वह कीॢत फैलायेंगे जिसे गा-गाकर मनुष्य भवसागरसे तर जायँगे। मूच्र्छा जाती रही, तब मारुति हनुमान्जी जागे और फिर वे सुग्रीवको खोजने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 835 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।
English explanation
He will spread his world-purifying glory; by singing it repeatedly, people will cross the ocean of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | संसार को | the world |
| पावनि | पवित्र करने वाली | purifying |
| कीरति | कीर्ति; यश | glory; renown |
| बिस्तरिहहिं | फैलाएँगे | will spread |
| गाइ | गाकर | by singing |
| गाइ | बार-बार गाकर | singing repeatedly |
| भवनिधि | संसाररूपी समुद्र | the ocean of worldly existence |
| नर | मनुष्य | people |
| तरिहहिं | पार करेंगे | will cross |
2 मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।
English explanation
His swoon passed and Hanuman, son of the wind god, awoke; he then began searching for Sugriva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुरुछा | मूर्छा; बेहोशी | swoon; unconsciousness |
| गइ | चली गई | passed away |
| मारुतसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| जागा | जागे; होश में आए | awoke; regained consciousness |
| सुग्रीवहि | सुग्रीव को | Sugriva, the monkey king |
| तब | तब | then |
| खोजन | खोजने | to search for |
| लागा | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.66
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 835
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 835, 836
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।