लङ्काकाण्ड · दोहा 66 · दोहा/सोरठा
जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।
जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।
एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.66 · पुस्तक पृ. 835, 836
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।
‘हे रघुवंश के मणि राम, जय हो, जय हो, जय हो!’ कहते हुए वानर हुंकार भरकर दौड़े।
English explanation
Shouting, ‘Victory, victory, victory to Rama, jewel of Raghu’s lineage!’ the monkeys charged with a great cry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | victory |
| जय | जय हो | victory |
| जय | जय हो | victory |
| रघुबंस | रघु का वंश | Raghu’s lineage |
| मनि | हे मणि, श्रेष्ठ राम | O jewel, Rama |
| धाए | दौड़े; धावा किया | rushed; charged |
| कपि | वानर | monkeys |
| दै | देकर; करते हुए | giving; raising |
| हूह | हुंकार; युद्ध का शोर | a roar; battle cry |
2 एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।
उन्होंने एक ही बार में कुम्भकर्ण पर पहाड़ों और वृक्षों के समूह फेंक दिए।
English explanation
All at once, they hurled masses of mountains and trees at Kumbhakarna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकहि | एक ही | one single |
| बार | बार; अवसर में | time; occasion |
| तासु | उसके, कुम्भकर्ण के | him, Kumbhakarna |
| पर | ऊपर; पर | at; upon |
| छाड़ेन्हि | उन्होंने फेंके | they hurled |
| गिरि | पहाड़ | mountains |
| तरु | वृक्ष | trees |
| जूह | समूह; ढेर | masses; groups |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 66
- स्रोत अभिलेख
- 6.66
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 835, 836
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