लङ्काकाण्ड · दोहा 65 · दोहा/सोरठा
अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।
अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।
काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.65 · पुस्तक पृ. 834, 835
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।
अंगद आदि वानरों को, सुग्रीव सहित, मूर्छित करके—
English explanation
Having rendered Angada and the other monkeys unconscious, including Sugriva—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंगदादि | अंगद आदि | Angada and the others |
| कपि | वानरों को | the monkeys |
| मुरुछित | मूर्छित, बेहोश | unconscious |
| करि | करके | having made |
| समेत | सहित | including |
| सुग्रीव | वानरराज सुग्रीव को | Sugriva, king of the monkeys |
2 काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।
अपरिमित बल की सीमा कुंभकर्ण वानरराज सुग्रीव को काँख में दबाकर चल पड़ा।
English explanation
Kumbhakarna, the very limit of immeasurable strength, departed with Sugriva, king of the monkeys, tucked under his arm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काँख | काँख में | under his arm |
| दाबि | दबाकर | holding tightly |
| कपिराज | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, king of the monkeys |
| कहुँ | को | object marker |
| चला | चल पड़ा | departed |
| अमित | अपरिमित | immeasurable |
| बल | बल की | of strength |
| सींव | सीमा, परम पराकाष्ठा | limit; utmost embodiment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 65
- स्रोत अभिलेख
- 6.65
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 834, 835
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।