लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआकाशमें [ऊँचे] चढ़कर वह बहुत-से अंगारे बरसाने लगा। पृथ्वीसे जलकी धाराएँ प्रकट होने लगीं। अनेक प्रकारके पिशाच तथा पिशाचिनियाँ नाच-नाचकर 'मारो, काटो की आवाज करने लगीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 822 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।
नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।
स्रोत अभिलेख 6.52 · पुस्तक पृ. 822, 823
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।
English explanation
He rises into the sky and showers abundant embers; streams of water emerge from the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नभ | आकाश में | into the sky |
| चढ़ि | चढ़कर | having risen |
| बरष | बरसाता है | showers down |
| बिपुल | बहुत-से | abundant |
| अंगारा | अंगारे | embers |
| महि | धरती | the earth |
| ते | से | from |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| होहिं | होती हैं | become |
| जलधारा | जल की धाराएँ | streams of water |
2 नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।
English explanation
Various male and female ghouls dance, crying, ‘Kill! Cut them down!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक प्रकार की | various |
| भाँति | प्रकार | kinds |
| पिसाच | पिशाच | male ghouls |
| पिसाची | पिशाचिनियाँ | female ghouls |
| मारु | मारो! | kill! |
| काटु | काटो! | cut them down! |
| धुनि | पुकार की ध्वनि | the cry |
| बोलहिं | बोलते हैं | utter |
| नाची | नाचते हुए | while dancing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 822
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 822, 823
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