लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह कभी तो विष्ठा, पीब, खून, बाल और हड्डियाँ बरसाता था और कभी बहुत-से पत्थर फेंके देता था। फिर उसने धूल बरसाकर ऐसा अँधेरा कर दिया कि अपना ही पसारा हुआ हाथ नहीं सूझता था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 822 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।
बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।
स्रोत अभिलेख 6.52 · पुस्तक पृ. 822, 823
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।
English explanation
He showers excrement, pus, blood, hair, and bones; at times he releases many stones.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिष्टा | मल | excrement |
| पूय | मवाद | pus |
| रुधिर | रक्त | blood |
| कच | बाल | hair |
| हाड़ा | हड्डियाँ | bones |
| बरषइ | बरसाता है | showers down |
| कबहुँ | कभी | at times |
| उपल | पत्थर | stones |
| बहु | बहुत-से | many |
| छाड़ा | छोड़ता है | releases |
2 बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।
English explanation
By showering dust, he made it so dark that even one’s own outstretched hand could not be seen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषि | बरसाकर | having showered |
| धूरि | धूल | dust |
| कीन्हेसि | उसने कर दिया | he made |
| अँधिआरा | अँधेरा | darkness |
| सूझ | दिखाई देता | is visible |
| न | नहीं | not |
| आपन | अपना | one’s own |
| हाथ | हाथ | hand |
| पसारा | फैलाया हुआ | outstretched |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 822
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 822, 823
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।