लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।
मूल पाठ
देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।
इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।
स्रोत अभिलेख 6.72 · पुस्तक पृ. 841, 842
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[और कहा—] कल मेरा पुरुषार्थ देखियेगा। अभी बहुत बड़ाई क्या करूँ? हे तात! मैंने अपने इष्टदेवसे जो बल और रथ पाया था वह बल [और रथ] अबतक आपको नहीं दिखलाया था॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 841 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।
English explanation
See my prowess tomorrow; why should I boast much about myself now?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखेहु | देखिए | see for yourself |
| कालि | कल | tomorrow |
| मोरि | मेरा | my |
| मनुसाई | वीरता और पराक्रम | valor and prowess |
| अबहिं | अभी | now |
| बहुत | बहुत | much |
| का | क्यों | why |
| करौं | मैं करूँ | should I do |
| बड़ाई | अपनी प्रशंसा | self-praise |
2 इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।
English explanation
I have received power and a chariot from my chosen deity; Father, I have not shown you that power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इष्टदेव | अपने आराध्य देवता | my chosen deity |
| सैं | से | from |
| बल | बल | power |
| रथ | रथ | a chariot |
| पायउँ | मैंने पाया है | I have received |
| सो | वह | that |
| बल | बल | power |
| तात | हे पिता | Father |
| न | नहीं | not |
| तोहि | आपको | to you |
| देखायउँ | मैंने दिखाया है | I have shown |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 841
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 841, 842
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।