लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसे देखकर विभीषण आगे आये और उसके चरणोंपर गिरकर अपना नाम सुनाया। छोटे भाईको उठाकर उसने हृदयसे लगा लिया और श्रीरघुनाथजीका भक्त जानकर वे उसके मनको प्रिय लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 833 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।
अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।
स्रोत अभिलेख 6.64 · पुस्तक पृ. 833, 834
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।
English explanation
Seeing Kumbhakarna, Vibhishana came forward, fell at his feet, and announced his own name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing him |
| बिभीषनु | कुंभकर्ण का छोटा भाई विभीषण | Vibhishana, Kumbhakarna's younger brother |
| आगें | आगे | forward |
| आयउ | आया | came |
| परेउ | गिर पड़ा | fell down |
| चरन | चरणों में | at his feet |
| निज | अपना | his own |
| नाम | नाम | name |
| सुनायउ | बताया | announced |
2 अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।
English explanation
Kumbhakarna lifted his younger brother and held him to his heart; knowing him to be Rama's devotee, he felt affection for him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई को | his younger brother |
| उठाइ | उठाकर | having lifted |
| हृदयँ | हृदय से | to his heart |
| तेहि | उसे, विभीषण को | him, Vibhishana |
| लायो | लगा लिया | held close |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम का | of Rama, lord of Raghu's line |
| भक्त | भक्त | devotee |
| जानि | जानकर | knowing |
| मन | मन को | to his heart |
| भायो | प्रिय लगा | was dear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 833
- सहायक विषय
- रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 833, 834
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।