लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।
मूल पाठ
तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।
तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।
स्रोत अभिलेख 6.64 · पुस्तक पृ. 833, 834
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[विभीषणने कहा—] हे तात! परम हितकर सलाह एवं विचार कहनेपर रावणने मुझे लात मारी। उसी ग्लानिके मारे मैं श्रीरघुनाथजीके पास चला आया। दीन देखकर प्रभुके मनको मैं [बहुत] प्रिय लगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 833 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।
English explanation
Vibhishana said: Dear brother, while I was offering carefully considered counsel for his highest good, Ravana kicked me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय बड़े भाई | dear elder brother |
| लात | लात | a kick |
| रावन | रावण ने | Ravana |
| मोहि | मुझे | me |
| मारा | मारा | struck |
| कहत | कहते समय | while offering |
| परम | अत्यंत | supremely |
| हित | हितकारी | beneficial |
| मंत्र | सलाह | counsel |
| बिचारा | विचारपूर्वक सोची हुई | carefully considered |
2 तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।
English explanation
Hurt by that humiliation, I came to Rama; seeing my distressed condition, the Lord took me to his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उसी से उत्पन्न | arising from that |
| गलानि | अपमान की पीड़ा | distress at humiliation |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu's line |
| पहिं | के पास | to |
| आयउँ | मैं आया | I came |
| देखि | देखकर | seeing |
| दीन | मुझे दीन-दुःखी | me distressed and helpless |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord Rama |
| के | के | of |
| मन | मन को | heart |
| भायउँ | मैं प्रिय लगा | I became dear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 833
- सहायक विषय
- रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 833, 834
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।