लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्होंने पर्वतको देखा, पर औषध न पहचान सके। तब हनुमान्जीने एकदमसे पर्वतको ही उखाड़ लिया। पर्वत लेकर हनुमान्जी रातहीमें आकाशमार्गसे दौड़ चले और अयोध्यापुरीके ऊपर पहुँच गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 827 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।
गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।
स्रोत अभिलेख 6.58 · पुस्तक पृ. 827, 828
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।
English explanation
Hanuman saw the mountain but could not identify the medicinal herb. He promptly uprooted and lifted the mountain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखा | देखा | saw |
| सैल | पर्वत | the mountain |
| न | नहीं | not |
| औषध | औषधि | the medicinal herb |
| चीन्हा | पहचाना | identify |
| सहसा | तुरंत | at once |
| कपि | हनुमान ने | Hanuman |
| उपारि | उखाड़कर | having uprooted |
| गिरि | पर्वत | the mountain |
| लीन्हा | उठा लिया | lifted |
2 गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।
English explanation
Holding the mountain, Hanuman sped through the sky at night and passed above the city of Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहि | पकड़कर | holding |
| गिरि | पर्वत | the mountain |
| निसि | रात में | at night |
| नभ | आकाश में | through the sky |
| धावत | तेजी से चलते | speeding along |
| भयऊ | लगे | began |
| अवधपुरी | अयोध्या नगरी के | of the city of Ayodhya |
| उपर | ऊपर | above |
| कपि | हनुमान | Hanuman |
| गयऊ | गए | passed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 827
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 827, 828
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।