लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददिनका अन्त होनेपर दोनों सेनाएँ लौट पड़ीं। [आजके युद्धमें] योद्धाओंको बड़ी थकावट हुई; परन्तु श्रीरामजीकी कृपासे वानरसेनाका बल उसी प्रकार बढ़ गया जैसे घास पाकर अग्नि बहुत बढ़ जाती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 841 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।
राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।
स्रोत अभिलेख 6.72 · पुस्तक पृ. 841, 842
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।
English explanation
AI draft: At the end of the day both armies withdrew; the warriors were greatly fatigued by battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिन | दिन | day |
| कें | के | of |
| अंत | अंत में | at the end |
| फिरीं | लौट गईं | returned |
| दोउ | दोनों | both |
| अनी | सेनाएँ | armies |
| समर | युद्ध में | in battle |
| भई | हुई | arose |
| सुभटन्ह | वीर योद्धाओं को | to the valiant warriors |
| श्रम | थकान | fatigue |
| घनी | बहुत अधिक | intense |
2 राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।
English explanation
Through Rama’s grace, the monkey army’s strength increased, like fire blazing fiercely when fed with dry grass.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम की | of Rama |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| कपि | वानरों की | of the monkeys |
| दल | सेना का | of the army |
| बल | बल | strength |
| बाढ़ा | बढ़ गया | increased |
| जिमि | जैसे | just as |
| तृन | तिनके | dry grass |
| पाइ | पाकर | having received |
| लाग | आग | fire |
| अति | बहुत | very |
| डाढ़ा | प्रबल होकर धधकती है | blazes fiercely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 841
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 841, 842
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।