लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददाँतोंमें तिनका दबाओ, गलेमें कुल्हाड़ी डालो और कुटुम्बियोंसहित अपनी स्त्रियोंको साथ लेकर, आदरपूर्वक जानकीजीको आगे करके, इस प्रकार सब भय छोड़कर चलो—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 790 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।
सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।
स्रोत अभिलेख 6.2 · पुस्तक पृ. 790, 791
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।
English explanation
Hold a blade of grass between your teeth and place an axe at your neck; take your family and your wife along.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसन | दाँतों में | between your teeth |
| गहहु | पकड़ो | hold |
| तृन | तिनका | a blade of grass |
| कंठ | गले पर | at your neck |
| कुठारी | कुल्हाड़ी | an axe |
| परिजन | परिवारजन | family members |
| सहित | सहित | together with |
| संग | साथ | along with |
| निज | अपनी | your own |
| नारी | पत्नी | wife |
2 सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।
English explanation
Respectfully placing Sita, Janaka’s daughter, in front, proceed in this manner, abandoning all fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता को | Sita, daughter of Janaka |
| करि | करके | having placed |
| आगें | आगे | in front |
| एहि | इस | this |
| बिधि | रीति से | in manner |
| चलहु | चलो | proceed |
| सकल | सभी | all |
| भय | भय | fear |
| त्यागें | छोड़कर | having abandoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 790
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 790, 791
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