लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।
मूल पाठ
नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।
अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।
स्रोत अभिलेख 6.2 · पुस्तक पृ. 790, 791
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजमदसे या मोहवश तुम जगज्जननी सीताजीको हर लाये हो। अब तुम मेरे शुभ वचन (मेरी हितभरी सलाह) सुनो! [उसके अनुसार चलनेसे] प्रभु श्रीरामजी तुम्हारे सब अपराध क्षमा कर देंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 790 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।
English explanation
O king, under the sway of pride or delusion, you abducted and brought here Sita, the Mother of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | हे राजा | O king |
| अभिमान | अहंकार | pride |
| मोह | मोह | delusion |
| बस | के वश में | under the sway of |
| किंबा | अथवा | or |
| हरि | हरण करके | having abducted |
| आनिहु | तुम ले आए | you brought here |
| सीता | सीता को | Sita |
| जगदंबा | जगत की माता | Mother of the world |
2 अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।
English explanation
Now listen to my counsel for your good. Lord Rama will forgive all your offenses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सुभ | हितकारी | beneficial |
| कहा | कही हुई बात | spoken counsel |
| सुनहु | सुनो | listen to |
| तुम्ह | तुम | you |
| मोरा | मेरी | my |
| सब | सभी | all |
| अपराध | अपराध | offenses |
| छमिहि | क्षमा करेंगे | will forgive |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| तोरा | तुम्हारे | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 790
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 790, 791
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