लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।
मूल पाठ
तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।
हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।
स्रोत अभिलेख 6.28 · पुस्तक पृ. 798, 799
भावार्थ
मूल पाठ के बादतो [फिर] वह दूत किसलिये भेजता है? शत्रुसे प्रीति (सन्धि) करते उसे लाज नहीं आती? [पहले] कैलासका मथन करनेवाली मेरी भुजाओंको देख। फिर अरे मूर्ख वानर! अपने मालिककी सराहना करना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 799 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।
English explanation
Then why does he send a messenger? Is he not ashamed to seek friendship with an enemy?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| बसीठ | दूत | a messenger |
| पठवत | भेजता है | sends |
| केहि | किस | what |
| काजा | प्रयोजन से | for purpose |
| रिपु | शत्रु | an enemy |
| सन | से; के साथ | with |
| प्रीति | मैत्री | friendship |
| करत | करते हुए | making |
| नहिं | नहीं | not |
| लाजा | लज्जा | shame |
2 हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।
English explanation
Look at my arms that shook Shiva’s Mount Kailasa; then, foolish monkey, praise your own lord!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरगिरि | शिव के पर्वत कैलास को | Shiva’s Mount Kailasa |
| मथन | हिला देने वाली | that shook |
| निरखु | देखो | look at |
| मम | मेरी | my |
| बाहू | भुजाएँ | arms |
| पुनि | फिर | then |
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| कपि | हे वानर | O monkey |
| निज | अपने | your own |
| प्रभुहि | स्वामी की | your lord |
| सराहू | प्रशंसा करो | praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 799
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 798, 799
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