लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।
मूल पाठ
तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।
सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।
स्रोत अभिलेख 6.99 · पुस्तक पृ. 873, 874
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसी रात त्रिजटाने सीताजीके पास जाकर उन्हें सब कथा कह सुनायी। शत्रुके सिर और भुजाओंकी बढ़तीका संवाद सुनकर सीताजीके हृदयमें बड़ा भय हुआ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 873 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।
English explanation
That same night, Trijata went to Sita and recounted the entire story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेही | उसी | that same |
| निसि | रात | night |
| सीता | सीता के | Sita, Rama’s wife |
| पहिं | पास | near; to |
| जाई | जाकर | having gone |
| त्रिजटा | त्रिजटा ने | Trijata, Sita’s sympathetic rakshasi companion |
| कहि | कहकर | telling |
| सब | सारी | all |
| कथा | कथा | the account |
| सुनाई | सुनाई | recounted |
2 सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।
English explanation
Hearing that the enemy Ravana’s heads and arms were multiplying, Sita felt great fear in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिर | सिरों | heads |
| भुज | भुजाओं | arms |
| बाढ़ि | बढ़ना | increase; regrowth |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| रिपु | शत्रु रावण | the enemy Ravana |
| केरी | के | of |
| सीता | सीता के | Sita’s |
| उर | हृदय में | in the heart |
| भइ | हुई | arose |
| त्रास | भय | fear |
| घनेरी | बहुत अधिक | very great |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 873
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 873, 874
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