लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।
मूल पाठ
मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।
होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।
स्रोत अभिलेख 6.99 · पुस्तक पृ. 873, 874
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उनका] मुख उदास हो गया, मनमें चिन्ता उत्पन्न हो गयी। तब सीताजी त्रिजटासे बोलीं— हे माता! बताती क्यों नहीं? क्या होगा? सम्पूर्ण विश्वको दु:ख देनेवाला यह किस प्रकार मरेगा?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 874 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।
English explanation
Her face grew downcast and anxiety arose in her mind. Then Sita spoke to Trijata.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुख | मुख | face |
| मलीन | उदास; कांतिहीन | downcast; wan |
| उपजी | उत्पन्न हुई | arose |
| मन | मन में | in the mind |
| चिंता | चिंता | anxiety |
| त्रिजटा | त्रिजटा | Trijata |
| सन | से | to |
| बोली | बोलीं | spoke |
| तब | तब | then |
| सीता | सीता | Sita |
2 होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।
English explanation
Mother, why do you not tell me what will happen? How will Ravana, who brings suffering to the world, die?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइहि | होगा | will happen |
| कहा | क्या | what |
| कहसि | तुम कहती हो | you tell |
| किन | क्यों नहीं | why not |
| माता | हे माता | O mother |
| केहि | किस | which; what |
| बिधि | रीति से | by what means |
| मरिहि | मरेगा | will die |
| बिस्व | संसार को | to the world |
| दुखदाता | दुःख देने वाला | giver of suffering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 874
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 873, 874
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।