लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउस दिव्य अनुपम और तेजके पुञ्ज (तेजोमय) रथपर कोसलपुरीके राजा श्रीरामचन्द्रजी हॢषत होकर चढ़े। उसमें चार चञ्चल, मनोहर, अजर, अमर और मनकी गतिके समान शीघ्र चलनेवाले (देवलोकके) घोड़े जुते थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 861 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।
चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।
स्रोत अभिलेख 6.89 · पुस्तक पृ. 861, 862
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।
English explanation
The chariot was a mass of radiance, celestial and matchless; Rama, king of Ayodhya, joyfully mounted it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेज | प्रकाश, तेज | radiance |
| पुंज | पुंज, संचित समूह | a concentrated mass |
| रथ | रथ | chariot |
| दिब्य | दिव्य | celestial |
| अनूपा | अनुपम | matchless |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चढ़े | चढ़े | mounted |
| कोसलपुर | कोसल की राजधानी अयोध्या के | of Ayodhya, Kosala’s capital |
| भूपा | राजा राम | the king, Rama |
2 चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।
English explanation
It had four spirited, beautiful horses, ageless and immortal, moving as swiftly as the mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चंचल | चपल, फुर्तीले | spirited, nimble |
| तुरग | घोड़े | horses |
| मनोहर | सुंदर, मन को भाने वाले | beautiful, captivating |
| चारी | चार | four |
| अजर | बुढ़ापे से रहित | ageless |
| अमर | मृत्यु से रहित | immortal |
| मन | मन | the mind |
| सम | के समान | like |
| गतिकारी | वेग से चलने वाले | moving swiftly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 861
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 861, 862
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