लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।
मूल पाठ
रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।
सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।
स्रोत अभिलेख 6.89 · पुस्तक पृ. 861, 862
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीको रथपर चढ़े देखकर वानर विशेष बल पाकर दौड़े। वानरोंकी मार सही नहीं जाती। तब रावणने माया फैलायी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 862 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।
English explanation
Seeing Rama mounted on the chariot, the monkeys gained exceptional strength and rushed forward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रथारूढ़ | रथ पर सवार | mounted on the chariot |
| रघुनाथहि | रघुकुल के स्वामी राम को | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| देखी | देखकर | on seeing |
| धाए | दौड़ पड़े | rushed forward |
| कपि | वानर | the monkeys |
| बलु | बल, सामर्थ्य | strength |
| पाइ | पाकर | having gained |
| बिसेषी | विशेष, बढ़ा हुआ | exceptional, heightened |
2 सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।
English explanation
The monkeys’ blows could not be endured; then Ravana spread his illusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सही | सहन की | endured |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकती थी | could be |
| कपिन्ह | वानरों | the monkeys |
| कै | की | of |
| मारी | मार, प्रहार | blows, assault |
| तब | तब | then |
| रावन | राक्षसराज रावण ने | Ravana, the demon king |
| माया | भ्रम उत्पन्न करने वाली माया | illusion-producing magic |
| बिस्तारी | फैलाई | spread |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.89
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 862
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 861, 862
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