लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।
मूल पाठ
तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।
प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.9 · पुस्तक पृ. 780, 780
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! मेरे वचनोंको बहुत आदरसे (बड़े गौरसे) सुनिये। मुझे मनमें कायर न समझ लीजियेगा। जगत्में ऐसे मनुष्य झुंड-के-झुंड (बहुत अधिक) हैं, जो प्यारी (मुँहपर मीठी लगनेवाली) बात ही सुनते और कहते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 780 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।
English explanation
Dear one, listen to my words with great respect; do not regard me as a coward in your mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे तात; प्रियजन | dear one |
| बचन | बात | words |
| मम | मेरी | my |
| सुनु | सुनो | listen |
| अति | बहुत | great |
| आदर | आदर से | with respect |
| जनि | मत | do not |
| मन | मन में | in your mind |
| गुनहु | विचारो; समझो | consider; regard |
| मोहि | मुझे | me |
| करि | मानकर | as being |
| कादर | कायर | a coward |
2 प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।
English explanation
People who listen to pleasing words and those who speak them are plentiful in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिय | प्रिय लगने वाली | pleasing |
| बानी | वाणी; बातें | speech; words |
| जे | जो लोग | those who |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| जे | जो लोग | those who |
| कहहीं | कहते हैं | speak |
| ऐसे | ऐसे | such |
| नर | लोग | people |
| निकाय | बहुत; समूह के समूह | in great numbers |
| जग | संसार में | in the world |
| अहहीं | हैं | are |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 780
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 780, 780
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।