लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[वे कहती हैं—] हे नाथ! तुम्हारे बलसे पृथ्वी सदा काँपती रहती थी। अग्रि, चन्द्रमा और सूर्य तुम्हारे सामने तेजहीन थे। शेष और कच्छप भी जिसका भार नहीं सह सकते थे, वही तुम्हारा शरीर आज धूलमें भरा हुआ पृथ्वीपर पड़ा है!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 881 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।
सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।
स्रोत अभिलेख 6.104 · पुस्तक पृ. 881, 882
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।
English explanation
O lord, the earth constantly trembled at your power; fire, the moon, and the sun lacked brilliance beside you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपके | your |
| बल | बल से | through power |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| डोल | डोलती थी | trembled |
| नित | नित्य | constantly |
| धरनी | धरती | the earth |
| तेज | तेज से | in brilliance |
| हीन | हीन | lacking |
| पावक | अग्नि | fire |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| तरनी | सूर्य | the sun |
2 सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।
English explanation
That very body, whose weight even Shesha and the cosmic tortoise could not bear, now lies on the ground covered in dust.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेष | पृथ्वीधारक शेषनाग | Shesha, the earth-supporting serpent |
| कमठ | पृथ्वीधारक कच्छप | the earth-supporting tortoise |
| सहि | सहन कर | bear |
| सकहिं | सकते हैं | are able to |
| न | नहीं | not |
| भारा | भार | the weight |
| सो | वही | that very |
| तनु | शरीर | body |
| भूमि | धरती पर | on the ground |
| परेउ | पड़ा है | lies fallen |
| भरि | भरकर; लिपटकर | covered with |
| छारा | धूल | dust |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 881
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 881, 882
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।