लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपतिकी दशा देखकर वे पुकार-पुकारकर रोने लगीं। उनके बाल खुल गये, देहकी सँभाल नहीं रही। वे अनेकों प्रकारसे छाती पीटती हैं और रोती हुई रावणके प्रतापका बखान करती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 881 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।
उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।
स्रोत अभिलेख 6.104 · पुस्तक पृ. 881, 882
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।
English explanation
Seeing their husband's condition, they cried out in lament; their hair came loose, and they paid no heed to their bodies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | पति की | their husband's |
| गति | दशा | condition |
| देखि | देखकर | seeing |
| ते | वे स्त्रियाँ | those women |
| करहिं | करती हैं | make |
| पुकारा | विलाप | cries of lament |
| छूटे | खुल गए | came loose |
| कच | बाल | hair |
| नहिं | नहीं | not |
| बपुष | शरीर | body |
| सँभारा | सँभाला; सुध रखी | attended to |
2 उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।
English explanation
They beat their breasts in various ways and, weeping, recount Ravana's might.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | छाती की | of the breast |
| ताड़ना | पिटाई | beating |
| करहिं | करती हैं | perform |
| बिधि | रीतियों से | in ways |
| नाना | अनेक | various |
| रोवत | रोते हुए | weeping |
| करहिं | करती हैं | make |
| प्रताप | पराक्रम का | of his might |
| बखाना | वर्णन | a recounting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 881
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 881, 882
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।