लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।
मूल पाठ
जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 875, 876
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे भारी योद्धा जहाँ-तहाँसे पर्वत और वृक्ष उखाड़कर [क्रोधसे] दाँत कटकटाकर दौड़े॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 876 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।
English explanation
Uprooting mountains and trees everywhere, the mighty monkey warriors charged, gnashing their teeth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| भूधर | पर्वत | mountains |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| उपारी | उखाड़कर | uprooting |
| धाए | दौड़ पड़े | charged |
| कटकटाइ | दाँत कटकटाकर | gnashing their teeth |
| भट | योद्धा | warriors |
| भारी | बलवान; प्रबल | mighty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 876
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 875, 876
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।