लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।
मूल पाठ
जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।
प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।
स्रोत अभिलेख 6.75 · पुस्तक पृ. 844, 845
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[इस प्रकार] जब श्रीरघुवीरने आज्ञा दी, तब कमरमें तरकस कसकर और धनुष सजाकर (चढ़ाकर) रणधीर श्रीलक्ष्मणजी प्रभुके प्रतापको हृदयमें धारण करके मेघके समान गम्भीर वाणी बोले—॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 845 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।
English explanation
When Rama gave the command, Lakshman fastened his quiver at his waist and readied his bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| दीन्हि | दी | gave |
| अनुसासन | आज्ञा | command |
| कटि | कमर में | at the waist |
| निषंग | तरकश | quiver |
| कसि | कसकर | fastening tightly |
| साजि | तैयार करके | readying |
| सरासन | धनुष | bow |
2 प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।
English explanation
Holding his Lord’s might in his heart, battle-steadfast Lakshman spoke in a deep voice like a thundercloud.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| प्रताप | प्रताप; पराक्रम | might; prowess |
| उर | हृदय में | in his heart |
| धरि | धारण करके | holding |
| रनधीरा | युद्ध में धीर लक्ष्मण | Lakshman, steadfast in battle |
| बोले | बोले | spoke |
| घन | बादल | a thundercloud |
| इव | के समान | like |
| गिरा | वाणी में | in a voice |
| गँभीरा | गंभीर; गहरी | deep; resonant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 845
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 844, 845
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।