लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।
मूल पाठ
जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।
राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।
स्रोत अभिलेख 6.104 · पुस्तक पृ. 881, 882
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम्हारी प्रभुता जगत्भरमें प्रसिद्ध है। तुम्हारे पुत्रों और कुटुम्बियोंके बलका हाय! वर्णन ही नहीं हो सकता। श्रीरामचन्द्रजीके विमुख होनेसे ही तुम्हारी ऐसी दुर्दशा हुई कि आज कुलमें कोई रोनेवाला भी न रह गया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 882 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।
English explanation
Your dominion is renowned throughout the world; the strength of your sons and kin cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगत | संसार में | in the world |
| बिदित | प्रसिद्ध | renowned |
| तुम्हारी | आपका | your |
| प्रभुताई | प्रभुत्व | dominion |
| सुत | पुत्रों का | of sons |
| परिजन | परिजनों का | of kin |
| बल | बल | strength |
| बरनि | वर्णन किया | be described |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
2 राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।
English explanation
Turning away from Rama has brought you to this condition; no one remains in the lineage even to mourn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम से | from Rama |
| बिमुख | विमुख होकर | having turned away |
| अस | ऐसी | such |
| हाल | दशा | a condition |
| तुम्हारा | आपकी | yours |
| रहा | बचा रहा | remained |
| न | नहीं | not |
| कोउ | कोई | anyone |
| कुल | कुल में | in the lineage |
| रोवनिहारा | रोने वाला | one to mourn |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 882
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 881, 882
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।