लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।
मूल पाठ
तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।
अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.104 · पुस्तक पृ. 881, 882
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! विधाताकी सारी सृष्टि तुम्हारे वशमें थी। लोकपाल सदा भयभीत होकर तुमको मस्तक नवाते थे। किन्तु हाय! अब तुम्हारे सिर और भुजाओंको गीदड़ खा रहे हैं। रामविमुखके लिये ऐसा होना अनुचित भी नहीं है (अर्थात् उचित ही है)॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 882 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।
English explanation
O lord, all of Brahma's creation was under your control; the guardians of the directions constantly bowed their heads in fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपके | your |
| बस | वश में | under control |
| बिधि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की | of Brahma, the creator |
| प्रपंच | सृष्टि | creation |
| सब | समस्त | all |
| नाथा | हे स्वामी | O lord |
| सभय | भयभीत होकर | in fear |
| दिसिप | दिशाओं के रक्षक | guardians of the directions |
| नित | नित्य | constantly |
| नावहिं | झुकाते थे | bowed |
| माथा | सिर | their heads |
2 अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।
English explanation
Now jackals eat your heads and arms; for one opposed to Rama, this is not an unfitting outcome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| तव | आपके | your |
| सिर | सिर | heads |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| जंबुक | सियार | jackals |
| खाहीं | खाते हैं | eat |
| राम | राम से | to Rama |
| बिमुख | विमुख व्यक्ति के लिए | for one opposed |
| यह | यह | this |
| अनुचित | अनुचित | unfitting |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 882
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 881, 882
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।