लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।
मूल पाठ
काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।
स्रोत अभिलेख 6.104 · पुस्तक पृ. 881, 882
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पति! कालके पूर्ण वशमें होनेसे तुमने [किसीका] कहना नहीं माना और चराचरके नाथ परमात्माको मनुष्य करके जाना॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 882 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।
English explanation
O husband, under the sway of Death you did not heed my words; you regarded the lord of all that is stationary and moving as a mere human.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | काल के | of Death |
| बिबस | वश में | under the sway |
| पति | हे पति | O husband |
| कहा | कही हुई बात | what I said |
| न | नहीं | not |
| माना | मानी | heeded |
| अग | स्थावर, जो चलते नहीं | all that is stationary |
| जग | जंगम, जो चलते हैं | all that moves |
| नाथु | स्वामी राम को | their lord, Rama |
| मनुज | मनुष्य | a human |
| करि | मानकर | as |
| जाना | समझा | regarded |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 882
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 881, 882
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