लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआज्ञा माँगकर और हाथोंमें उत्तम भिंदिपाल, साँगी (बरछी), तोमर, मुद्गर, प्रचण्ड फरसे, शूल, दुधारी तलवार, परिघ और पहाड़ोंके टुकड़े लेकर राक्षस चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 811 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।
तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।
स्रोत अभिलेख 6.4 · पुस्तक पृ. 811, 812
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।
English explanation
Having sought permission, the demons set out, holding projectile weapons and fine lances in their hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| मागी | माँगकर | having requested |
| गहि | पकड़कर | holding |
| कर | हाथों में | in their hands |
| भिंडिपाल | भिंडिपाल नामक प्रक्षेपास्त्र | a kind of missile weapon |
| बर | उत्तम | fine |
| साँगी | साँगें, लंबे भाले | lances |
2 तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।
English explanation
They carried javelins, heavy clubs, formidable axes, spears, swords, iron bludgeons, and chunks of mountain rock.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोमर | तोमर, फेंकने वाले भाले | javelins |
| मुग्दर | भारी गदाएँ | heavy clubs |
| परसु | कुल्हाड़े | battle-axes |
| प्रचंडा | प्रचंड | formidable |
| सुल | शूल, नुकीले भाले | spears |
| कृपान | तलवारें | swords |
| परिघ | लोहे के भारी डंडे | iron bludgeons |
| गिरिखंडा | पर्वत के टुकड़े | chunks of mountain rock |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 811
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 811, 812
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